प्रिय विद्यार्थी एवं अभिभावक

हमारे समाज में उत्कृष्ट बाल साहित्य की पिछले कई वर्षों से कमी रही है। इसके परिणामस्वरूप संस्कारों एवं सामाजिक मान्यताओं में निरंतर कमी दिखाई दे रही है। आज समाज में जो विभिन्न विकृतियाँ देखने को मिल रही हैं, उनका एक प्रमुख कारण बच्चों को सही दिशा एवं मार्गदर्शन का अभाव है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आज जिस कमी को हम महसूस कर रहे हैं, उसे हम सार्थक शिक्षा कह सकते हैं — ऐसी शिक्षा जो जीवन से जुड़ी हो, जो बच्चों को बेहतर इंसान बनाए और उन्हें परिवार, समाज तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दे।

चाहे विद्यालय हों या बाल पत्रिकाएँ, बच्चे केवल विषयों का ज्ञान ही नहीं प्राप्त करते, बल्कि जीवन मूल्यों को भी सीखते हैं। दुर्भाग्यवश, टीवी एवं मोबाइल पर प्रसारित मूल्यहीन कार्टून और कार्यक्रमों ने बच्चों के मन-मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डाला है।

हमारी बाल पत्रिका Page 10 का मुख्य उद्देश्य बच्चों के समक्ष ऐसे जीवन-मूल्य एवं आदर्श प्रस्तुत करना है, जो उनके मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धन के साथ-साथ उनके चरित्र निर्माण में भी सहायक सिद्ध हों।

Page 10 पत्रिका में विद्यार्थियों के लिए सामान्य ज्ञान, मनोविज्ञान, नैतिक शिक्षा, क्राफ्ट, खेल, मनोरंजन, देश-विदेश की जानकारी, टीवी जगत की रोचक बातें, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा संबंधी उपयोगी जानकारी कुशल अध्यापकों एवं अनुभवी व्यक्तियों द्वारा प्रत्येक अंक में प्रदान की जाती रहेगी।

हमारी बाल पत्रिका Page 10 एक छोटा-सा प्रयास है, जो गागर में सागर भरने के समान है। हमारी हार्दिक शुभकामना है कि बच्चे इसे आनंदपूर्वक पढ़ें, सीखें और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ।

धन्यवाद !

आपका

मनीष शुक्ला

प्रधान संपादक